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एसआईआर के पहले चरण में 89.40% गणना फॉर्म डिजिटलाइज्ड, दावे-आपत्तियों के बाद होगी अंतिम मतदाता सूची जारी
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 8 जून से शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया का पहला चरण 7 जुलाई 2026 को पूरा हो रहा है। निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश में करीब 8.41 लाख मतदाता ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की संभावना है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में प्रदेश के मतदाताओं की संख्या में करीब 10 लाख की कमी दर्ज हो सकती है, जिससे आगामी चुनावों का राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, प्रदेश में जनवरी 2026 तक कुल 84.55 लाख मतदाता दर्ज थे। एसआईआर के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार फिलहाल 79.60 लाख मतदाताओं का सत्यापन किया गया, जिनमें से 71.16 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म डिजिटलाइज्ड किए जा चुके हैं। यह कुल मतदाताओं का 89.40 प्रतिशत है।
शेष 8.41 लाख मतदाताओं को एएसडी (Absent, Shifted, Dead) श्रेणी में रखा गया है, जिनकी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार एएसडी श्रेणी में शामिल मतदाताओं में—
इन सभी मामलों का अंतिम निर्णय दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद लिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार एसआईआर शुरू होने से पहले ही प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 4.95 लाख मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से हटाए जा चुके थे। इस प्रकार प्री-एसआईआर और वर्तमान एसआईआर को मिलाकर कुल 13.36 लाख नामों पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है।
राज्य के सभी जिलों में गणना फॉर्म तेजी से डिजिटल किए गए हैं। रुद्रप्रयाग में सर्वाधिक 94.27 प्रतिशत, जबकि देहरादून में 86.08 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में 86.34 प्रतिशत फॉर्म डिजिटलाइज किए जा चुके हैं।
एसआईआर के दौरान जिन जिलों में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटने की संभावना है, उनमें—
प्रमुख हैं।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि बीएलओ द्वारा घर-घर सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त गणना फॉर्मों का डिजिटलाइजेशन लगभग पूरा हो चुका है। 14 जुलाई को प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसके बाद नागरिकों को एक माह तक दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। अंतिम सूची आपत्तियों के निस्तारण के बाद जारी होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाताओं की संख्या में संभावित कमी आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति और परिणामों को प्रभावित कर सकती है। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप राणा के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं के स्थायी रूप से अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने और मृत मतदाताओं के नाम हटने से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे एएसडी श्रेणी में शामिल मतदाताओं से संपर्क कर पात्र मतदाताओं का सत्यापन सुनिश्चित कराएं, ताकि कोई भी योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित न रह जाए।