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ऑर्किड पार्क घोटाला: दुबई में गिरफ्तार बिल्डर राखी मित्तल पहुंची हाईकोर्ट, FIR रद्द करने की मांग

देहरादून।

सहस्रधारा रोड स्थित ऑर्किड पार्क ग्रुप हाउसिंग परियोजना में करीब 90 फ्लैट खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी के मामले में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। दुबई में इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार की गई भगोड़ी बिल्डर राखी मित्तल ने अब उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वर्ष 2020 में डालनवाला थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। याचिका में एफआईआर से अपना नाम हटाने और पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट के ई-कोर्ट पोर्टल के अनुसार, राखी मित्तल ने 20 मई 2026 को याचिका दाखिल की है। फिलहाल यह मामला तकनीकी कमियों के कारण “फ्रेश केस एज डिफेक्टिव” श्रेणी में दर्ज है और नियमित सुनवाई के लिए अभी कोई तिथि निर्धारित नहीं हुई है।

इधर, देहरादून पुलिस राखी मित्तल को भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इंटरपोल की सहायता से दुबई में गिरफ्तारी के बाद अब कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे भारत लाया जाएगा। मामले का मुख्य आरोपी और राखी का पति दीपक मित्तल अभी भी फरार है।

45 करोड़ की कथित ठगी का आरोप

राखी मित्तल और दीपक मित्तल अपनी कंपनी पुष्पांजलि इंफ्राटेक के माध्यम से सहस्रधारा रोड पर ऑर्किड पार्क ग्रुप हाउसिंग परियोजना विकसित कर रहे थे। परियोजना में आठ टावरों में 331 फ्लैट बनाए जाने थे, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। आरोप है कि बिल्डर दंपती ने लगभग 90 खरीदारों से 45 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लेने के बाद वर्ष 2018 में निर्माण कार्य बंद कर दिया और वर्ष 2020 में परिवार सहित फरार हो गए।

मामले में दोनों के खिलाफ देहरादून में करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने पहले ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कराया, जिसे बाद में रेड कॉर्नर नोटिस में परिवर्तित किया गया। इसके बाद इंटरपोल की कार्रवाई में राखी मित्तल दुबई में गिरफ्तार हुई।

ईडी और एसटीएफ भी कर रही जांच

प्रकरण की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और उत्तराखंड एसटीएफ भी कर रही है। जांच में सामने आया था कि फरारी से पहले कंपनी के खातों से लगभग 7.46 करोड़ रुपये निकालकर तीन करीबी लोगों के खातों में ट्रांसफर किए गए थे। बाद में इन्हीं लोगों ने परियोजना में कई फ्लैट बुक किए। ईडी पहले ही परियोजना से जुड़ी संपत्तियों को अटैच कर चुकी है।

इस बीच पंजाब नेशनल बैंक का लगभग 21 करोड़ रुपये का ऋण भी एनपीए हो चुका है। परियोजना के साझेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है और मामला एनसीएलटी सहित विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में लंबित है।

फ्लैट खरीदार अब भी कर रहे इंतजार

ऑर्किड पार्क फेज-1 और फेज-2 से जुड़े 62 मामले रेरा में भी लंबित हैं। परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है और खरीदार वर्षों से अपने घर या निवेश की राशि वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में एक ओर राखी मित्तल को भारत लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं हाईकोर्ट में दायर याचिका ने इस बहुचर्चित मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है।

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