- उत्तराखण्ड: शहरों का होगा कायाकल्प
- 98 छोटे-बड़े शहरों के मास्टर प्लान जल्द होंगे तैयार
- देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, नैनीताल समेत सात शहर अमृत-1 में
देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी।
पौड़ी जनपद में कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी, ऊधमसिह नगर जनपद में जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर, नैनीताल जनपद में रामनगर, हरिद्वार जनपद में मंगलौर, लक्सर, चंपावत में टनकपुर, चमोली में गोपेश्वर, देहरादून में ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी एवं टिहरी।
उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां द्वितीय और तृतीय श्रेणी के निकायों के लिए भी जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इससे बेहतर भूमि उपयोग, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, बेहतर यातायात प्रबंधन, ड्रेनेज योजना और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
नए महायोजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ळप्ै आधारित प्लानिंग है। इसके माध्यम से शहरों एवं उनके आसपास के क्षेत्रों का तकनीकी एवं समग्र आकलन करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की योजना तैयार की जा रही है। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सुनियोजित एवं क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकास, पर्यटन को बढ़ावा, स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसरों का सृजन, भौतिक एवं सामाजिक अवस्थापना सुविधाओं का प्रावधान तथा पर्यावरण का संरक्षण इसका उद्देश्य हैं।
प्रदेश के आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप महायोजनाओं में भविष्य की सभी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजित विकास पर फोकस किया गया है। महायोजना से सभी संबंधित कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाएगा।