नई दिल्ली। भारत सरकार ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) के प्रावधानों को सरल बनाते हुए भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में कारोबार करना आसान किया है। सरकार का उद्देश्य प्रक्रियागत अड़चनों को कम कर भारतीय कंपनियों को वैश्विक रक्षा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।


OGEL का दायरा 41 देशों से बढ़कर लगभग पूरी दुनिया तक
संशोधित व्यवस्था के तहत OGEL का दायरा पहले के 41 देशों से बढ़ाकर लगभग सभी देशों तक किया गया है। हालांकि संवेदनशील, प्रतिबंधित देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के दायरे वाले देशों को इससे बाहर रखा गया है। इस बदलाव से भारतीय रक्षा उत्पाद निर्माताओं को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार के अवसर मिल सकते हैं।
लाइसेंस की अवधि दो से बढ़कर तीन साल
सरकार ने OGEL की वैधता अवधि भी बढ़ा दी है। अब यह लाइसेंस दो साल के बजाय तीन साल तक मान्य रहेगा। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया से राहत मिलेगी और कागजी कार्रवाई तथा प्रशासनिक खर्च कम होने की उम्मीद है।
विदेशी टेंडर और प्रदर्शनियों में तेजी से ले सकेंगे हिस्सा
नए नियमों के तहत अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनियों और टेंडर में भाग लेने के लिए पहले की कई प्रक्रियागत बाधाओं को कम किया गया है। इससे भारतीय कंपनियां विदेशी सरकारों, सेनाओं और रक्षा कंपनियों द्वारा जारी अवसरों पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगी।
गैर-घातक रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए भी कुछ मामलों में पहले आवश्यक माने जाने वाले विभागीय विचार-विमर्श को हटाया गया है। इससे रडार, हेलमेट, बॉडी आर्मर और अन्य सुरक्षा उपकरणों जैसे उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है।
MSME सेक्टर को मिल सकता है बड़ा फायदा
नियमों में ढील का सबसे बड़ा लाभ रक्षा क्षेत्र से जुड़ी MSME और निजी कंपनियों को मिलने की उम्मीद है। छोटी कंपनियों के लिए जटिल सरकारी प्रक्रियाओं और बार-बार मंजूरी लेने में समय और संसाधन खर्च होते हैं। आसान OGEL व्यवस्था से ऐसी कंपनियां विदेशी ग्राहकों तक तेजी से पहुंच बना सकेंगी।
एकल OGEL SOP से प्रक्रिया होगी सरल
रक्षा उत्पादन विभाग ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए मौजूद तीन OGEL SOP को मिलाकर एक सिंगल OGEL SOP तैयार किया है। इससे निर्यातकों को एकीकृत और आसान प्रक्रिया उपलब्ध होगी। साथ ही OGEL के तहत आने वाले रक्षा उत्पादों की सूची का भी विस्तार किया गया है।
लंबे कारोबारी समझौतों को भी राहत
नए प्रावधानों के तहत विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) के साथ दीर्घकालिक अनुबंध रखने वाली पात्र भारतीय कंपनियों को भी राहत दी गई है। निर्धारित शर्तों के तहत ऐसे अनुबंधों की अवधि के अनुरूप OGEL की वैधता प्रदान की जा सकती है।
रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन के बीच निर्यात बढ़ाने पर जोर
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारत का रक्षा उत्पादन और निर्यात लगातार बढ़ रहा है। सरकार अब घरेलू उत्पादन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े स्तर पर बदलने पर जोर दे रही है। आसान निर्यात व्यवस्था से भारतीय कंपनियों को लागत, समय और प्रक्रियागत बाधाओं के मामले में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि रक्षा निर्यात के नियमों को सरल करने से भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान मिलेगी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी गति मिल सकती है और भारत एक भरोसेमंद वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है।