- हरेला केवल पर्व नहीं, प्रकृति संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का जनआंदोलन हैः मुख्यमंत्री
- हरेला पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प, एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ने का आह्वान
- लोक संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता उत्तराखंड की सबसे बड़ी पहचानः मुख्यमंत्री
- लोक कलाकारों, शिल्पकारों और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश ही नहीं देता, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं का ऐसा महापर्व है, जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है। उन्होंने कहा कि यही उत्तराखंड की साझा सांस्कृतिक विरासत और विविधता में एकता की भावना का सबसे सशक्त उदाहरण है।